Tuesday, September 9, 2008

आसमान में बादलों की आवारगी

चित्रकार तो एक से एक हैं लेकिन मौसम की आवारगी कभी कभी आसमान में बैहतरीन चित्र उकेर देती है. बादलों की इस आवारगी को ओमकार चौधरी ने अपने कैमरे में कैद किया..ओमकार चौधरी डी एल ऐ मेरठ के स्थानीय सम्पादक हैं

20 comments:

Shastri said...

वाह, क्या गजब का चित्र है. काश अपने केमरे के साथ मैं भी वहां होता!!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- बूंद बूंद से घट भरे. आज आपकी एक छोटी सी टिप्पणी, एक छोटा सा प्रोत्साहन, कल हिन्दीजगत को एक बडा सागर बना सकता है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!

seema gupta said...

wow, really eye catching.

Regards

शायदा said...

बहुत सुंदर फोटो है। आज ही पता चला उनके इस हुनर का। शुक्रिया मनविंदर।

संगीता पुरी said...

बहुत अच्छा चित्र है।

मीत said...

kudrat ki is khoobsurati ko humse bantne ke liye abhar...
meri hosla afjai ke liye shukriya...

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सुंदर अदभुत

Deepak Bhanre said...

वाकई प्रकृति के बहुत सुंदर नजारे को कैद किया गया है.

mamta said...

सुंदर ।

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

chitr bahut achcha laga pr badalo ki chahalakadami achchi lagi.

ओमकार चौधरी said...

थैंक्स फोटो अपने ब्लॉग पर देने के लिए.

pallavi trivedi said...

beautiful picture...

मीनाक्षी said...

एक झलक देखकर ही पता चल जाता है कि प्रकृति का रोम रोम सुन्दर है.

Ranjan said...

sundar

अनूप शुक्ल said...

बढ़िया है।

Dr. Chandra Kumar Jain said...

कैमरे की नज़र और आपका यह चयन
दोनों सार्थक...सटीक...सुंदर हैं.....बधाई.
================================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

parul said...

bhut khoob mam
very nice

श्रीकांत पाराशर said...

Nayanabhiram.

Suresh Chandra Gupta said...

बहुत ही सुंदर चित्र है.

जब हम बच्चे थे और एक छोटे शहर में रहते थे जहाँ आसमान नजर आता था, तब सफ़ेद बादलों में तस्वीरें खोजा करते थे,जानवरों की, पक्षियों की. हाथी दादा तो अक्सर नजर आते थे. यह तस्वीर देख कर आज वह दिन याद आ गए.

ज़ाकिर हुसैन said...

वास्तव में सुन्दर फोटो.
इसे देख कर तो अपना मन भी आवारागर्दी करने को मचल उठा

मुकेश कुमार मिश्र said...

अद्भुत और अविस्मरणीय पल.......