Monday, December 8, 2008

उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू

वक्त ने मुझे समझाया
तब बड़ी मुश्किल से
हामी भरी थी तुम्हें भेजने की
भारी मन से गाड़ी सजायी
प्यार की झालरें लटकायीं
तुम्हें रवाना किया
खिड़की से जब जाती गाड़ी देखी
तो उसमें तुम अकेले नहीं थे
और वो वक्त कर गया मुझे उदास
सोचें बंट गई दो खेमों में
एक उदास तो दूसरी समझदार
उदास को समझदार ने कहा
उदास न हो
जरा ऊपर देख
प्यार की झालरों पर है तेरा नाम
उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू

25 comments:

श्यामल सुमन said...

घड़ी विरह की आयी फिर भी गीत खुशी के गाऊँ।
विरह के बाद मिलन है संभव सोच सोच मुस्काऊँ।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

sanjay said...

सच बहुत खूबसूरत .............काफी अच्छा लिखा है
www.yaadonkaaaina.blogspot.com

परमजीत बाली said...

bahut sundar!!!
.काफी अच्छा लिखा है ---

उदास न हो
जरा ऊपर देख
प्यार की झालरों पर है तेरा नाम
उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू

शोभा said...

achha likha hai. bhavuk kar diya.

Vijay Kumar Sappatti said...

Dear Manvinder,

aap bahut accha likhti hai ji ..

उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू...

ye lines ruhani hai , bus is kavita ki khushbu hi alag hai ...

regards,

Vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

tanu sharmaa said...

भावुक अभिव्यक्ति....

रंजना [रंजू भाटिया] said...

प्यार की झालरों पर है तेरा नाम
उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू

बहुत बढ़िया भावपूर्ण कविता लिखी है आपने

सुशील कुमार छौक्कर said...

जज्बातों से भरी रचना।
उदास न हो
जरा ऊपर देख
प्यार की झालरों पर है तेरा नाम
उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू

बहुत खूब।

बवाल said...

वाह वाह क्या खूबसूरत सा अहसास है, कविता में जी,
विरह रो रहा है,
मिलन गा रहा है,
किसे याद रख लूं ?
किसे भूल जाऊं ?

डॉ .अनुराग said...

बहुत खूब..!

विवेक सिंह said...

बहुत बढ़िया .भावुक अभिव्यक्ति !

mehek said...

प्यार की झालरों पर है तेरा नाम
उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू
bahut sundar

Udan Tashtari said...

अति भावपूर्ण रचना..इतना कम क्यूँ लिखती हैं आप??

Vidhu said...

एक उदास तो दूसरी समझदार
उदास को समझदार ने कहा
shabd sanyojan sundar hai,badhai

"अर्श" said...

बहोत ही बढ़िया एहसासात है साथ में भाऊक कर देने वाली पंक्तियाँ ,बहोत ही सुंदर कविता लिखा है आपने ... ढेरो बधाई आपको.. बहोत दिनों से आपके ब्लॉग पे आना नही हो सका इसकेलिए क्षमा चाहूँगा ....
अर्श

ओमकार चौधरी said...

भावनाप्रद रचना. आपकी रचनाधर्मिता एक अलग तरह की अनुभूति प्रदान करती है. शब्द बहुत गहरे अर्थ लिए होते हैं. एक अच्छी रचना के लिए बधाई.

प्रकाश बादल said...

वाह अच्छा लिखा है लिखती रहें

Harkirat Haqeer said...

मनविन्‍दर जी बहुत दिनों बाद आपकी तरफ आई आपकी सभी कविताएं मन को छू लेने वाली हैं
बार-बार पढने को जी चाहता है...बधाई।

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर ओर भावपुर्ण कविता लिखी आप ने.
धन्यवाद

नीरज गोस्वामी said...

प्यार की झालरों पर है तेरा नाम
उसकी छुहन में है तेरी ही खुश्बू
वाह...वाह...क्या नाजुक खयाली है...आप कितनी सहजता से मन की बात कह जाती हैं...ये हुनर हर किसी में नहीं होता...
नीरज

makrand said...

bahut sunder rachana

विनय said...

बहुत शानदर प्रविष्टि!

BrijmohanShrivastava said...

gambheer

poemsnpuja said...

बड़ी खूबसूरत हैं ये प्यार की झालरें...और आप की खुशबू. कोमल अनछुई सी कविता.

Rajat Narula said...

its majestic, realy awesome...