Sunday, December 28, 2008

यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा

सुबह सवेरे
कोहरे में सब कुछ
धुंधला गया
गुलाब का बूटा
जिससे महकता था आंगन
दरख्त जहां पलती थी गर्माहट
मोड़ जहां इंतजार का डेरा था
कुछ भी तो नहीं दिख रहा
सब धुंधला गया
दिल पर हाथ रखा तो
वह धड़क गया
तेरे ख्याल भर से
सोचा
यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास

27 comments:

महेंद्र मिश्रा said...

यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास
bahut sundar badhiya parikalpana . dhanyawad.

श्यामल सुमन said...

मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास

सुन्दर प्रस्तुति। कहते भी हैं कि-

खुशबू तेरे बदन की मेरे साथ साथ है।
कह दो जरा हवा से तन्हा नहीं हूँ मैं।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

मीत said...

ख़ूब ! मुझे न जाने क्यों एक शेर याद आ गया :

किस किस तरह की दिल में गुज़रतीं हैं हसरतें
है वस्ल से ज़ियादा मज़ा इंतज़ार में

pintu said...

kya bat hai!
bahut sundar parstuti!

"अर्श" said...

बहोत खूब लिखा है आपने ढेरो बधाई .................


अर्श

Shashwat Shekhar said...

दिल पर हाथ रखा तो
वह धड़क गया....
जिस तरह से धड़का, बहुत अच्छा लगा पढ़कर|

विनय said...

अति सुन्दर, प्रशंसा करने योग्य!

राज भाटिय़ा said...

यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास
वाह क्या बात है, बहुत सुंदर भाव
धन्यवाद

seema gupta said...

यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास
" bhut sunder'

regards

Nirmla Kapila said...

दिल पर हाथ ------बडिया लिखा है

Vijay Kumar Sappatti said...

aapne itni achi nazm likhi ki , ab kahne ko kuch baaki hi nahi raha ..

मोड़ जहां इंतजार का डेरा था

दिल पर हाथ रखा तो वह धड़क गया तेरे ख्याल भर से

मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास

behtareen pankhitiyan hai abhivyakhti ki ,aur man ki baat kahne ki ....

aapko itni achi rachana ke liye badhai ...

aap bahut dino se mere blog par nahi aayi .. meri rachnayen aapke sneh ki raah dekh rahi hai ..

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

Amit said...

bahut he sundar likha hai...

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत ही सुन्दर ख्याल लिख दिया जी आपने।
यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास
बहुत खूब।

makrand said...

तेरे ख्याल भर से
सोचा
यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास

bahut sunder rachana

नीरज गोस्वामी said...

बहुत मोहक अंदाज़ में आप ने दिल की बात बयां की है....बधाई..
नीरज

शोभा said...

यह ख्याल है या जिक्र भर तेरा
तुम कहते हो
मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास
दिल की गहराई से लिखी पंक्तियाँ हैं।

विनय said...

नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!

Harkirat Haqeer said...

aayi tgi nav varsh ki bdhai dene per aapki choti si kavita ne chu liya kahin bhot hi acchi nazam ... bhot bhot bdhai...

नव वर्ष की शुभ कामनायें...


कुछ रहा वही दर्द का काफिला साथ
कुछ स्‍नेह भरा आप सब का सर पर हाथ....

Harkirat Haqeer said...

गुलाब का बूटा
जिससे महकता था आंगन
दरख्त जहां पलती थी गर्माहट
मोड़ जहां इंतजार का डेरा था
कुछ भी तो नहीं दिख रहा
सब धुंधला गया
दिल पर हाथ रखा तो
वह धड़क गया
तेरे ख्याल भर से
wah...

Dev said...

First of All Wish U Very Happy New Year....

मैं कहीं गया नहीं, यही हूं तेरे पास

Sundra kriti...

Regards...

tanu sharmaa said...

सुन्दर ख्याल...
नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं...

COMMON MAN said...

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति. आपको नववर्ष की शुभकामनायें, जब भी आप नया लिखें मेरे ब्लाग पर लिंक अवश्य छोड़ दें.

प्रदीप मानोरिया said...

नव वर्ष में वंदन नया ,
उल्लास नव आशा नई |
हो भोर नव आभा नई,
रवि तेज नव ऊर्जा नई |
विश्वास नव उत्साह नव,
नव चेतना उमंग नई |
विस्मृत जो बीती बात है ,
संकल्प नव परनती नई |
है भावना परिद्रश्य बदले ,
अनुभूति नव हो सुखमई |

shyam kori 'uday' said...

...नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

प्रदीप मानोरिया said...

सुंदर बहुत अच्छा

Irshad said...

Oh! Kya kahoo? Lajawab kar Diya.

poemsnpuja said...

खूबसूरत लिखा है.