Sunday, March 22, 2009

जिंदगी रख के भूल गई है मुझे

जिंदगी रख के भूल गई है मुझे

और मैं जिंदगी के लिये

बह्मी बूटी खोज रही हूं

मिले तो जिंदगी को पिला दूं

और वो मुझे याद कर ले

37 comments:

दिगम्बर नासवा said...

जिंदगी रख के भूल गई है मुझे
खूबसूरत....बहूत ही उम्दा
कुछ ही लाइनों में इतनी लम्बी और गहरी बात आपके ही लेखन में मिलती है
बधाई

अनिल कुमार वर्मा said...

मानविन्दर जी, आपके ब्लाग पर अक्सर आना होता है,हां टिप्पणी करने में थोड़ा आलस आ जाता है लेकिन आपकी लिखी कविताएं पढ़ता रहता हूं, कम शब्दों में जिन्दगी की उलझनों को अभिव्यक्त करने का आपका तरीका वाकई लाजवाब है, मेरे ब्लॉग पर आकर टिप्पणी करने के लिए शुक्रिया। इन टिप्पणियों से मेरा हौसला बढ़ता है और लिखने की प्रेरणा मिलती है।

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह क्या कहने। सच बहुत ही उम्दा लिखा है।

शोभा said...

वाह बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

SWAPN said...

जिंदगी रख के भूल गई है मुझे

gagar men sagar, bahut khoob , manvinder ji, badhai

kanchan aprajita said...

bahut acchi rachna..

विवेक said...

पहली लाइन तो खींच लेती है अपनी ओर...

rekhamaitra said...

Jab wo bootee aap zindgee ko pilayen to mujhe bhee bula leejiyega ,hath laga doongee ;pooja karte waqt sath jo khara ho uska hath lagwa lete hein na! lagta hai ki kavita se tipparee lambee ho gaee. Apko bahut -bahut badhee!!

मा पलायनम ! said...

जिंदगी रख के भूल गई है मुझे...
पहली पंक्ति से ही वजन बन गया .

रचना said...

sahii kikha miljaaye butii to patent karaa lae bahuto ko jarurat hogee

irdgird said...

मिल जाए तो हमें भी पता बताइएगा। तलाश तो हमें भी है।

mehek said...

sach choti si kavita pura zindagi ka saar samaye,sunder badhai

मीत said...

बढ़िया है ....

"ज़िन्दगी ... "रख के" भूल गई है ..."

बहुत बढ़िया है ...

संध्या आर्य said...

aasha our nirasha dono hi ek chakka ke do pahlu hai .jindgi ek chakka hai jisame aasha our nirasha do pahlu ........
aasha hi to jiwan ki gadi ko aage badati hai
......achchhi abhivyakti

इरशाद अली said...

गहरे, शाब्दिक सार्थक प्रयोगों की बानगी। हल्के-हल्के, छोटे-छोटे अर्थो में बड़ी बातें और निजी अनुभवों का साझा। आप आत्मियता की चादर आपबीती के धागों से बुनती हैं, तब जाकर कविता होती है।

Harkirat Haqeer said...

अय ज़िन्दगी!
न छोडा कर यूँ राहों में तन्हां
कहीं मेरा यार बहक न जाये....!!

शारदा अरोरा said...

जिन्दगी रख के भूल गयी है मुझे
बड़ी सुन्दर पंक्ति लिखी आपने , वो भूल गयी और हम सब्र के घूँट पिए अपना वजूद तलाशते रहे |

ओम आर्य said...

ओशो ने कहीं पे कहा है " जिंदगी एक सपना है, जिसे आत्मा देखती है " आपने शायद आत्मा के बारे कह रहीं हैं की वो इस जिंदगी को भूल गयी है.

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया...

अनूप शुक्ल said...

बड़ा अच्छा प्लान है!

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही गहरी बात लिख दी आप ने....
कि जिंदगी रख के भूल गई है मुझे...
धन्यवाद

"अर्श" said...

aapki rachna ki pahali pankti to mujhe gazal ke misre ki tarah nazar aarahi hai.... aapse aanumati ke baad kabhi ispe ek gazal likhunga... bahot khubsurat aur behad umda likha hai aapne hamesha se aapka murid raha hun ... dhero badhaaee aapka...

arsh

संगीता पुरी said...

गंभीर रचना ... सुंदर अभिव्‍यक्ति।

श्यामल सुमन said...

कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया आपने। वाह। किसी ने कहा है कि-

हिन्दगी इक फलसफा है पर कहानी और है।
जी रहे हैं फिर भी लेकिन जिन्दगानी और है।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

बवाल said...

कितनी बड़ी बात क्या सहजता से कही आपने ! वाह वाह ! बहुत बधाई आपको जी ।

seema gupta said...

जिंदगी रख के भूल गई है मुझे

"बेहद ही संजीदा भाव.....जिन्दगी का काम ही है भूलना और हमारा उसी तलाश में शायद जिन्दगी भर लगे रहना...."

regards

कंचन सिंह चौहान said...

bahut hi achchhe....! Vaquai Amrita Pritam ki yad aati hai aap ko padh kar

Santhosh said...

hi, nice to go through ur blog...it is really well informative..by the way which typing tool are you using for typing in Hindi...?

recently i was searching for the user friendly Indian Language typing tool and found ... "quillpad". do u use the same..?

Heard tht it is much more superior than the Google's indic transliteration...!?

expressing our views in our own mother tongue is a great feeling...and it is our duty to save, protect, popularize and communicate in our own mother tongue...

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Jai..Ho...

harijoshin said...

kabhi ek pal bhi...
kabhi yeh udasi...
dil mera bhoole...
tabhi chupke se
dabe paon akar
dukh mujhe choo le...

Mili film ke geet ki lines yaad aa gai...

Nice madam.... Great lines.

Dr.Bhawna said...

बहुत सुंदर...

pukhraaj said...

jindgi sirf palatti ja rahi hai
hawaon me haruf uda rahi hai
umr ki seedhi par chadhte hue sochte hain hum
kahan ke liye chale the hum
jaane kahan jindge le ja rahi hai ....

ओमकार चौधरी said...

बहुत अच्छी रचना है.
कुछ पंक्तियों में सब कुछ
कह देना आसान नहीं होता.
ज़िन्दगी का कुल फलसफा
आपने इस रचना में कह दिया.
बहुत बधाई.

रविकांत पाण्डेय said...

वाह! इसे कहते हैं बूँद में सागर भरना।

Mumukshh Ki Rachanain said...

टूटते परिवार की कहानियां तो बहुत सुनी पर पहली बार "खुद के खुद से टूटे रिश्तों" की बात सुनी और उस पर मरहम लगाने का ऐसा अनोखा प्रयास सराहनीय ही है.

मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.

चन्द्र मोहन गुप्त

BrijmohanShrivastava said...

यह तो जिंदगी की पुरानी आदत है /न जाने कितनो को भूली हुई है /सोचती होगी ""दुखियों से भरा है सारा ज़माना ,किसे याद रखना किसे भूल जाना ""जिंदगी उन्ही को याद रखती है जो स्वम अपने को याद रखते है

omsherryom said...

jindagi bhoo gayi hai humein...ya hum jindagi ko bhulaye hue hain...bas lagatar aar-paar ki daud mein khoye hue hain....duniadaari ke beech apni jindgi gawaye hue hain...

bahut behtareen dill ko chooone wali panktiyaan...zindagi ki yaad wapas dilane ke liye shukriya

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी वा बहुत बेहतरीन लिखा है आपने बहुत अच्‍छा