मेरे शहर की बेटियां अब अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं . मंगल वार की सुबह सवेरे शास्त्री नगर की झलक को उसके घर में घुस कर जावेद ने अपनी हेवानियत का शिकार बनाया और उसका गला दबा कर उसे मारने का दुसाहस किया . ....चोट खाए होंठ .... गालों पर नाखूनों के निशाँ और गर्दन पर लाली तो झलक का बहरी दर्द है लेकिन उसके अन्दर का दर्द चीख चीख कर कह रहा है की हम लड़कियां अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें.......
झलक का दोष बस इतना ही है की वो जावेद के साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी .....आई आई ऍम टी की ये छात्र इस समाया आनंद हॉस्पिटल में अपने अंदरूनी और बाहरी दर्द के साथ जूझ रही है
आप क्या कहते हैं झलक के साथ हुए हादसे पर ......शहर की सुरक्षा पर
2 comments:
ਆਪ ਦੇ ਬਲਾਗ 'ਤੇ ਪਹਿਲੀ ਬਾਰ ਆਉਣ ਦਾ ਸਬੱਬ ਬਣਿਆ...ਪੰਕਿਤੀ ਬਲਾਗ ਰਾਹੀਂ...ਲੱਗਦਾ ਤੁਸੀਂ ਪੰਜਾਬੀ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ?
ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਲਿਖਦੇ ਹੋ..ਲੜਕੀਆਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕੌਣ ਕਰੇ?ਸੱਚੀਂ ਹੀ ਵੱਡਾ ਤੇ ਉਲ਼ੱਝਿਆ ਸਵਾਲ ਹੈ..ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ..ਕੁਝ ਕਰਨਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਿਸ਼ਾ 'ਚ?
ਹਰਦੀਪ
thnks sadhu ji.....
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