Sunday, June 28, 2009

......और नज्म अडोल खड़ी रह गई

रात जब जाग गई तो ...... अपनी ही लिखी नज्म ...... सिरहाने आन खड़ी हुई ...... नींद से बेजार आंखों ने ...... नज्म के फिक्रे के पीछे .......... छिपे साये को देखा.......... साया चुपचाप ....... गारे के इतिहास में उतर गया ........ दबी यादों को कुरेदने लगा........ सिले जख्मों के धागे ....... उसने नज्म के हवाले कर दिये ........... नज्म के होंठों में कंपन देख ........ साया फिक्रे में ......... जा मिला ........ और ..... नज्म अडोल खड़ी रह गई .........

44 comments:

SWAPN said...

kamaal ki prastuti, aapki kalpnasheelta aur unko shabdon men baandhna , daad deni hogi, bahut khoob likha hai manvinder ji, badhai sweekaren.

राकेश जैन said...

achha likha hai apne, maine pahli bar apko padha, bahut achha laga..badhai

M VERMA said...

नज्म ने तो नज्म लिख डाली
वाह ----

ओम आर्य said...

aap jo bhi likhate ho usame itani gahari baat chhupi rahati hai ki aatmaa tak baat pahuchati hai ................bahut hi sundar

इरशाद अली said...

वर्मा जी ठीक कह रहे है! यहां तो नज्म ने ही नज्म लिख डाली। वैसे नज़्म एक बहाना भर है, असल में तो ये बयां है, दर्द की कतरनों का। आपके पास ऐसे ना जाने कितने जोड़ी लिबास है, जो कतरनों की शक्ल में दर्द की तरजुमानी हैं। जो लोग ऐसी नज़्में लिखते है, कैसे होते होगें?

Udan Tashtari said...

सत्य है-नज्म से उपजी एक नज्म!! जय हो आपकी.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत भावपूर्ण लिखा है आपनें .

AlbelaKhatri.com said...

umda !
bahut umda nazm !

AlbelaKhatri.com said...

umda !
bahut umda nazm !

AlbelaKhatri.com said...

umda !
bahut umda nazm !

परमजीत बाली said...

bahut sundar !!

सुशील कुमार छौक्कर said...

आप हमेशा कम लिखती है पर जो भी लिखती वो बहुत ही उम्दा लिखती है। आपके लिखे शब्दों में बहुत गहराई होती है। एक अलग अहसास महसूस होता है। अद्भुत।

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

नज्म के दर्द का एहसास,
सुन्दर प्रस्तुतीकरण.
बधाई

Kishore Choudhary said...

गारे के इतिहास में उतर गया ..
बहुत खूब ! नज़्म उम्दा है पसंद आई, बधाई

awaz do humko said...

kafi ghahrai hai..... bahut achcha laga

महामंत्री - तस्लीम said...

मन के भावों की खूबसूरत अभिव्‍यक्ति।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

SALEEM AKHTER SIDDIQUI said...

aap ehsas ke us samunder main le jati hain. jahan umar ka koi bandhan nahin hota. aadmi apne aap ko umar ke us hisse main le jata hai, jahan sirf pyar hi pyar hota hai. badhai.

SALEEM AKHTER SIDDIQUI said...

aap ehsas ke us samunder main le jati hain. jahan umar ka koi bandhan nahin hota. aadmi apne aap ko umar ke us hisse main le jata hai, jahan sirf pyar hi pyar hota hai. badhai.

Nirmla Kapila said...

गहरे मे छुपी भावनाओं की बेजोड प्रस्तुति अन्दर छुपी भावनायें हमेशा ही ऐसी नज़्में घडती रेहती हैं और अडोल ही ऐसी रचना रच देती हैं बहुत सुन्दत अभव्यक्ति है आभार्

cartoonist anurag said...

bahut hi shandar...........
badhai..........

दिगम्बर नासवा said...

आपके शब्द बोलते हुवे लगते हैं............ अजीब सा एहसास जगह देती हैं आपकी रचनाएं.......... मन की गहराइयों से निकली हुए होती है आपकी हर रचना....... लाजवाब

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत सुन्दर

मुकेश कुमार तिवारी said...

मनविन्दर जी,

एक नज़्म को जन्म लेते हुये महसूस किया जा सकता है।

बहुत अच्छी रचना।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

pukhraaj said...

नज़्म का सपना नज़्म ने देखा ..
यादों के जख्म कुरेदने लगा ....

बहुत सुंदर लिखा आपने

अमिताभ श्रीवास्तव said...

nzam ka ye bhi ek andaaz.
pasand aaya.

Prem Farrukhabadi said...

bahut hi sundar!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

भावों की सुन्दरतम प्रस्तुति....रचना अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई।

Pyaasa Sajal said...

ghazab ka lekhan..ek alag si kriti

Mumukshh Ki Rachanain said...

गज़ब की सोंच, गज़ब की प्रस्तुति

बधाई स्वीकार करें.

चन्द्र मोहन गुप्त

yuva said...

Aapki sundar tippani ke liye shukriya. Bahut hee achchhi nazm hai aapki. 'Adol' ka prayog adbhut hai. Badhai

श्रद्धा जैन said...

kamaal ki nazm kahti hai aap
padha phir padha phir ek baar aur padha shabad seedhe man par asar karte rahe

bahut bholi aur bahut massom kahti hai aap

बवाल said...

आदरणीय मन्विन्दर जी,
क्या ही बेहतरीन लहजे में आप बात कह गईं ।
जबलपूर से हमारा सलाम क़ुबूल फ़रमाइएगा जी इस चुनिंदा रचना के लिए। और हाँ जी बहुत बहुत आभार भी।

hem pandey said...

सुंदर भावाभिव्यक्ति.

शोभना चौरे said...

achhi prstuti.

SUNIL KUMAR said...

महोदय,
नमस्कार।
www.artnewsweekly.com

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सुनील कुमार
9999024943
www.artnewsweekly.com

jamos jhalla said...

gazal ke haath ,yaadon ki kalam aur simple shabdon ki syaahi .sundar ati sundar
angrezi-vichar.blogspot.com
jhallevichar.blogspot.com

दर्पण साह "दर्शन" said...

नज्म अडोल खड़ी रह गई....


wah !!

nazm to time prrof hoti hai ji !!

Dr. Smt. ajit gupta said...

रात का जागना और स्‍वयं का जागना एक समान है। बिताये कौन से दिन कब सामने आ खड़े होंगे, कुछ पता ही नहीं चलता। दिल कौन से सपने बुनना चाहता है, वे भी थपकी देने लगते हैं। अच्‍छी रचना, बधाई।

मनोज गौतम said...

आपकी अभिव्यक्ति का कोई जबाब नहीं ।

नीरज गोस्वामी said...

इस लाजवाब नज़्म और आपके जन्म दिन के लिए ढेरों बधाईयाँ...
नीरज

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

मनविन्दर जी
HAPPY BIRTHDAY
HEARTY-CONGRATULATIONS




thankx
HEY PRABHU YAH TERAPANTH
MUMBAI-TIGER

त्रिपुरारि कुमार शर्मा said...

आपकी नज़्में पढ कर एक खमोशी रूह में उतर जाती है और मेरी तमन्ना भी अक्सर यही होती है ...

raj said...

pahli baar apke blog pe aayee hun...and n speechless....kitne gahre bhaw hai or kitne kam shabad...

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत खूब!