Wednesday, April 1, 2009

रह गया तेरे होने का जिक्र.........

रह गया तेरे होने का जिक्र

बन गया खामोश अहसास

अब तो आदत सी हो गई है इस जिक्र की

क्योंकि ये हर वक्त साथ साथ चलता है

कभी ये मेरे दिल में उतरता है

और मुझसे बातें करता है

बात करने का मन हो न हो

यह बात करता है ,तेरे होने की

37 comments:

seema gupta said...

रह गया तेरे होने का जिक्र

बन गया खामोश अहसास

" भावनाओ का सैलाब जैसे उमड़ आया हो.."

Regards

डॉ. मनोज मिश्र said...

बन गया खामोश अहसास.....
सुंदर भाव.

Jayant Chaudhary said...

"बात करने का मन हो न हो
यह बात करता है ,तेरे होने की"

Very nice... Simple and touching.

~Jayant

कुश said...

तन्हाई में जब ये मन बाते करता है तो एक अजीब सी हलचल होती है

बवाल said...

बहुत ख़ूब मन्विन्दर जी। आप ही कह सकते हो इतने भले अंदाज़ में यह बात। वाह वाह।

रज़िया "राज़" said...

बात करने का मन हो न हो

यह बात करता है ,तेरे होने की

सुंदर दिल की बातें ज़बान पर आने से पहले ही कविता का रूप लेती हैं। बहोत ख़ुब।

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर!भावपूर्ण।

नीरज गोस्वामी said...

बात करने का मन हो न हो
यह बात करता है ,तेरे होने की

वाह....लाजवाब....कितने सुन्दर शब्द...
नीरज

apnesapne said...

bahut khoob madam...

kitne ache tarike se Ahasas karaya hai apne... khamosh bhavnao ka..

दिगम्बर नासवा said...

रह गया तेरे होने का जिक्र
बन गया खामोश अहसास
अब तो आदत सी हो गई है इस जिक्र की

खूबसूरत हैं आपके शब्द हमेशा की तरह.....
ये पंक्तियाँ तो बहूत ही नायाब हैं.......

इरशाद अली said...

अब हमें कहने-सूनने और सूनाने के उस मोड़ पर आ ही जाना चाहिये, जब ये पता किया जा सके कि ऐसी नज्म क्योंकर लिखी जाती है। हमसब लोग ऊपर से ऊपर ही तैरकर जा रहे है जबकि यहां डूबने को गहराई बहुत है। ये भी पाठको की जिम्मेदारी बनती है कि वो क्या लिखवाना चाहता हैं। आप देखिये तो ’’ यह बात करता है, तेरे होने की ’’ एक-एक लाईन जिंदा-जावेद नजर आती है, इशारा करती है, कुछ हुआ लेकिन क्या!

हिमांशु । Himanshu said...

"रह गया तेरे होने का जिक्र बन गया खामोश अहसास"
इन शुरुआती पंक्तियों ने ही प्रभाव डाल दिया । रचना के लिये धन्यवाद ।

mehek said...

bahut sunder

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर सी कोमल अभिव्यक्ति!!

sanjay vyas said...

किसी की उपस्थिति का मृदु अहसासों के साथ संवेदनास्पद बयां. सुंदर.

मोहन वशिष्‍ठ said...

कभी ये मेरे दिल में उतरता है

और मुझसे बातें करता है

बात करने का मन हो न हो

यह बात करता है ,तेरे होने की

वाह जी वाह बहुत बेहतरीन

SWAPN said...

bahut khoon manvinder ji, yaaden jab man par niyantran kar leti hain aisa hi hota hai.behad khubsurat panktian.
बात करने का मन हो न हो

यह बात करता है ,तेरे होने की

wah

डॉ .अनुराग said...

खामोशी की आवाज ....

ओमकार चौधरी said...

कभी ये मेरे दिल में उतरता है
और मुझसे बातें करता है
बात करने का मन हो न हो
यह बात करता है, तेरे होने की

बहुत कम अल्फाज़ में बहुत कुछ कह दिया.
वाकई जब कोई खास पास नहीं होता, तब
भी उससे बातें करते रहते हैं. शायद उससे नहीं..अपने आप से. इसी को स्वाध्याय भी कहा गया है. जो स्वाध्याय करने लगता है, वह दार्शनिक भी हो जाता है और अध्यात्मिक भी. आपको बधाई.

मीत said...

क्या बात है !!!

shama said...

Aapse ek guzaarish leke aayee hun...ek lekh likha hai( uski pehlee kadi hai, filhaal),"ye kahan aa gaye ham?", is sheershak tehet...
Vishay wastu hai, ke ham jo apne gadjets, jaise cell phone, net communication, jinka apnaa dimaag to hata nahee, itnaa adhik wishwas kar baithte hain, ki qareeebee rishonme dararen padtee nazar aane lagtee hai...dostke kehnese adhik us intsrument ne kya, aur kab kaha hai, ye adhik wishwasneey maan lete hain..
aapki naraazgi ke baawjood aapko ye binatee kar rahee hun..phir ekbaar kshama prarthi hun..
Mujhe nahee pata ki aaplogon se wo pehlasa pyar milega ya nahee...lekin yahan ek wastviktaase rubaru ho rahee hun, aapse sabheese baantnaa chah rahee hun...

राज भाटिय़ा said...

बात करने का मन हो न हो
यह बात करता है ,तेरे होने की
वाह कवि का मन भी कहां कहा से बाते निकाल लेता है, बहुत सुंदर.
धन्यवाद

अनिल कान्त : said...

दिल की बात तो ऐसे ही होती है

विनय said...

बिल्कुल मेरे दिल की बात

Shefali Pande said...

behad khoobsurat panktiyaan....

SALEEM AKHTER SIDDIQUI said...

manvinder ji,
itna busy hone ke bawjood kavita ke liye waqt kaise nikalti hai.

Dr Sandeep kumar garg said...

COMPUTER is a familiar word , which has changed the modern life with its super powers.
It has formed an essential part in today’s working.
Computers have a spiceal position in the present
only the calculations,but Scenario of living.It not performs

Dr Sandeep kumar garg said...

Motto:
To stress upon 1. “Prevention of Kidney disease”
2. “Rehabilitation of patients on renal replacement therapy like renal transplant and Dialysis

Dr Sandeep kumar garg said...

Presently:
Working as consultant nephrologist, Transplant physician and intensivist in Meerut, with special intrest in paediatric nephrology and Critical care.

vijaymaudgill said...

सच में जनाब ख़ामोशी बोलती है। बहुत ख़ूब।

Dr Sandeep kumar garg said...

ABSTRACT
A 27 year old male, presented with infertility and retention of urine for which he was evaluate clinically and radio logically, was found to have a large seminal vesicle cyst for which Transurethral approach was tried and with cystoscop, unroofing of cystic wall was done on the bladder neck.

Dr Sandeep kumar garg said...

Seminal vesicle cyst is a rare urological problem.[1],[2],[3] First case reported by Zinner in 1941. Seminal vesicle cysts may be congenital or acquired [1]. Present since birth, congenital cysts develop and become symptomatic in young adulthood. Accumulation of secretions in the gland owing to insufficient drainage, which is associated with atresia of the ejaculatory ducts, causes subsequent distension of the seminal vesicles, leading to formation of a cyst [6]. The cysts are usually unilateral with no predilection for side [3]. Acquired cysts are often bilateral and are seen in an older age group after a history of chronic prostatitis or prostate surgery. The seminal vesicles are paired secretory glands just posterior to the bladder. Congenital anomalies of the seminal vesicles including ectopia, hypoplasia, cyst formation and agenesis and other internal genital abnormalities are frequently associated. Most seminal vesical cysts remain asymptomatic until puberty, but with the widespread use of ultrasonography during pregnancy and infancy there are likely to be more asymptomatic cases [1, 2]. The potential complications are infection, compression of the surrounding structures [3–6], infertility and malignant degeneration. Most patients with this anomaly are asymptomatic or present during early adulthood with non-specific symptoms. Usually the cysts are 5.0 cm or less in diameter and are either a symptomatic or present during early adulthood with symptoms such as urgency, burning, hematuria and hypogastric pain mainly after coitus. Less frequently cysts larger than 8-10 cm occur and such giant cysts can result in colon or bladder obstruction with palpation of mass per rectum. Here we report a young male presenting with bilateral hydronephrosis hydroureter with acute renal failure because of giant seminal vesicle cyst causing urinary retention

प्रदीप मानोरिया said...

बात करने का मन हो न हो

यह बात करता है ,तेरे होने की
गहरी भावाभिव्यक्ति हार्दिक धन्यबाद
विगत एक माह से ब्लॉग जगत से अपनी अनुपस्तिथि के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ

Dr Sandeep kumar garg said...

INDIAN ACADEMY OF NEPHROLOGY


President: Sub: 4th Annual Conference of Indian Academy of Nephrology
(IAN 2009)

Dr. S.C.Dash

Secretary: Respected Sir/Madam,


Dr. S.K . Aggarwal We are pleased to invite you for the 4th Annual conference of


Organizing Secretary: IAN in Chennai at Sri Ramachandra University on


Dr.P.Soundararajan 25-04-2009, pre conference lecture followed by inaugural


ceremony will be on 24-04-2009.


We invite you to participate and make this event a grand

success.



Thanking you



Yours Sincerely



PROF.P.SOUNDARARAJAN
Organizing Secretary
IAN 2009

Dr Sandeep kumar garg said...

daer manvinder ji
waiting for new blog of urs so that i can put new and intresting comment of mine yours faithfully dr sandeep garg

neha said...

bahut badiya.......

ishwar said...

बहन जी आपके लगभग सभी रचनाओ को पढ़ा, सबसे पहले आप व आपके कोमल/ निश्छल/पवित्र भावनाए जिन्हें आपने शब्द दिए , उन्हें ह्रदय की गहराइयों से प्रणाम , मेरे पास इससे ज्यादा शब्द भी नहीं है कि मे साहित्यिक शब्दों मे उनका गुण गान करू , बस जिस प्रकार एक गुंगा किसी मीठे का रसास्वादन तो कर लेता है परन्तु उस स्वाद का बखान नहीं कर पाता , ठीक उसी प्रकार मैंने भी उन रचनाओ का रास्वस्वदन किया , आपने अपने भावनाओ को ब्लॉग के माद्यम से हम जेसे लोगो तक परोसा इस शुभ कार्य के लिए आप धन्यवाद के पात्र है, आप व आपके शुभ चिंतको को मेरे और से बहुत सारी शुभकामना ....बस इतना ही एक और भाई/ प्रशंशक आज की तारीख मे आपके रचनाओं से जुड़ गया ... इश्वर