उस दिन
आसमान साफ था
बादलों में हलचल थी
वो अचानक मिले
जब उन्हें होश आया तो काफी आगे निकल चुके थे
वापस आना संभव न था
उस दिन
बदली ने कहा
मैं हवाअों के वश में हूं
मेरी किसमत में हैं पहाड़ों की चट्टानें
मेरे सामने हैं न खत्म होने वाली राहें
बिछड़ते हुए उदास न होना
कहीं
भटक जाऊं पहाड़ों में
या सुनसान राहों में
और मुझे नसीब हो रेत की एक कब्र
उस कब्र पर अगर पहुंचो
तो उस पर इबारत टांक देना
" हम उल्टी दिशायों के बादल
अचानक टकरा गये
फिर सारी उम्र लड़ते रहे हवाअों के खिलाफ "