Friday, March 26, 2010
दो सहेलियां ....एक देह में रहती हैं
Thursday, February 18, 2010
उसकी प्यास न पानी बनी न आग
उस रात .....................
वो अकेली नहीं ...........................
उस के साथ रात भी जली थी .......................
मैंने उसे आग अर्पित की ..........................
वो और भी सर्द हुई ................................
समन्दर की बात की .............................
तो वो और भी खुश्क हुई ................................
उस की प्यास न पानी बनी ................................
ना आग .....................................
उसके दोष अँधेरे नहीं .................................
रौशनी थे ..............................
उसकी भटकन केवल रिद्हम थी ............................
जब साज निशब्द हुए ..................................
तो वो मीरा बनी ...................................
राबिया हुई ...................................
आखिर .........................................
मंदिर का प्रसाद हुई .........................................
मस्जिद की दुआ हुई ...................................................
पत्र का शीर्षक क्या होगा ?
Tuesday, January 26, 2010
इमरोज ......इक लोकगीत सा
Tuesday, January 5, 2010
अब वो शांत था ......
