Thursday, October 25, 2012

मेरी और "अडोल" की एक प्यारी सी मुलाकात , मोहन भंडारी जी से ....







मोहन  भंडारी जी पंजाबी के बड़े लेखक हैं....उनकी पंजाबी की   पुस्तक  "मून दी अक्ख" के लिए उन्हें साहित्य अकेडमी पुरस्कार से भी नवाजा गया है .......चंडीगड़ में उनके निवास पर उनसे मिलने का अवसर प्राप्त हुआ
इस मुलाकात का मुझे अरसे से इन्तजार था |



उनसे मिली तो लगा की  उन्हें भी मुझसे मिलने का बेताभी से इन्तजार था |
मैं जैसे ही निवास पर अपने पतिदेव के साथ पहुंची ,
वो खिड़की में  हमारा इन्तजार कर रहे थे .....मैन गेट पर झट से आ गए ....
उनकी पत्नी हमें सेक्टर ३४ सी के मोड़ पर ही लेने आई हुईं थी |
नहीं जानती इतनी  भीड़भाड़ वाली सड़क  पर  उन्होंने मुझे कैसे पहचान कर गले लगा लिया 
बड़ा प्यारा पल था जब हमारी मोहन भानादारी जी से मुलाकात हुई |
मुझे फ़ोन से ही पता चला था की वे बीमार हैं|
दो दिन पहले ही वे अस्पताल से लौटे थे .....लेकिन उन्हें इन्तजार में खड़े देख  ख़ुशी भी हुई......यह भी महसूस किया कि वे कितने प्यारे इंसान हैं,
तभी तो फ़ोन पर बात होने के बाद उन्होंने मेरी नज्में मंगवाई और पुस्तक "अडोल "का प्रीफेस लिख कर भेज दिया |
मेरी अडोल को उन्होंने ऐसे माथे पर लगाया जैसे कोई शगुन लेकर अपने माथे पर लगता है ......उनके साथ तीन घटे कैसे बीत गए....पता ही नहीं चला 
उनसे हुई बातों को विस्तार से अगली पोस्ट में लिखूंगी .....

Saturday, October 6, 2012

"अडोल" मेरी नज्मों का गुलदस्ता

 लीजिये ......
मेरी "अडोल" के चेहरे से घूँघट 
उठा दिया मेरी माँ ने ....
"अडोल" मेरी नज्मों का गुलदस्ता
"अडोल "..
उन हादसों और मुलाकातों का जिक्र भर है 
जो मुझे कभी ख़बरों के सफर में मिले और जुदा हो गए 
लेकिन उनका असर रह गया 
मैंने उन्हें नज्म की शकल देने का एक पर्यास भर किया है

"मसलन वो लड़की जो शहर की दीवारों पे लिखती रहती है शहर भर में "